सबसे पहले तो आपको साफ़ कर दें की 15 अगस्त 1947 को जो भारत को अंग्रेजो से आज़ादी मिली थी
उसके लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट में अंग्रेजो ने "इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट" को पास किया था
ये आज़ादी असल में सत्ता का हस्तांतरण थी
जो तस्वीर आप ऊपर देख रहे है, उसमे अंग्रेजी माउंटबैटेन नेहरू के साथ बैठा हुआ है, ये तस्वीर पूरी नहीं है वहां पर जिन्ना भी बैठा हुआ था, माउंटबैटेन भारत की सत्ता का हस्तांतरण नेहरू को कर रहा था और पाकिस्तान की सत्ता जिन्ना को दी जा रही थी
आजकल कांग्रेस के नेता टीवी पर और साथ हो सोशल मीडिया पर एक चीज बड़े जोर देकर कहते है
कहते है की, आज़ादी तो कांग्रेस ने अंग्रेजो से लड़कर दिलाई, आरएसएस और बाकि हिन्दू
संगठन तो अंग्रेजो के दलाल थे, अंग्रेजो के लिए जासूसी किया करते थे
अंग्रेजो के जासूस थे
पर यहाँ गौर करने वाली चीज है की अंग्रेज भी बहुत चालाक थे, हिटलर ने 1945 तक ब्रिटेन की कमर तोड़ दी थी, ब्रिटैन की स्तिथि बहुत कमजोर हो गयी थी, भारत संभल नहीं रहा था
यहाँ क्रांतिकारियों ने हल्ला मचाया हुआ था, ऐसे में अंग्रेजो को सत्ता भारतियों को सौंपनी पड़ी
अगर आरएसएस वाले और हिन्दू संगठन अंग्रेजो के जासूस थे, अंग्रेजो के पिट्ठू थे
तो अंग्रेज भी यही चाहते होंगे की वो भारत की सत्ता ऐसे लोगों को सौंपे जो की उनके पिट्ठू हो, पर अंग्रेजो ने आरएसएस और हिन्दू संगठनो को सत्ता तो नहीं सौंपा
अंग्रेजो ने तो सत्ता गाँधी-नेहरू को सौंपा
अगर आरएसएस वाले अंग्रेजो के जासूस थे, तो अंग्रेजो ने अपने जासूसों को सत्ता क्यों नहीं सौंपा
नेहरू-गाँधी को क्यों सौंपा, इस प्रश्न पर आपको विचार करना चाहिए, और कॉंग्रेसी नेताओं से भी ये प्रश्न जरूर पूछना चाहिए
