श्रीलंका की सरकार वहां पर एक बड़ा काम कर रही है, और इस काम की शुरुवात भी कर दी गयी है, श्रीलंका की सरकार ने फैसला किया है की देश में 1 भी रोहिंग्या को रहने नहीं दिया जायेगा, और इसी कड़ी में सरकार ने सभी रोहिंग्यों की पहचान का काम शुरू कर दिया है, और उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है
श्रीलंका में भी रोहिंग्यों और अन्य तरह के कट्टरपंथियों की समस्या भारत की तरह ही है, पर वहां की सरकार ने रोहिंग्यों को निकालने का फैसला किया तो न वहां की सुप्रीम कोर्ट ने इसमें कोई अड़ंगा लगाया और न ही वहां के विपक्ष ने कोई विरोध किया, वहां का विपक्ष भी अपने देश की सरकार के साथ है, और रोहिंग्यों को बाहर करने में सरकार का साथ दे रहा है
Srilanka Govt doing search operation against Rohingyas & sending them back with help of BaudhBhikshus, opposition parties are also with Govt. In Bharat Jaish-E-Seculars want to make them Damad.— Prashant P. Umrao (@ippatel) March 13, 2018
श्रीलंका में जैसे जैसे कट्टरपंथियों के कारण समस्या बढ़ रही है, वहां की सरकार और सख्त होती जा रही है, और कट्टरपंथियों के साथ विपक्ष भी नहीं है, और रोहिंग्यों को वहां की सरकार निकाल रही है, भारत में इसका उलट है, वहां की सरकार तो गैर क़ानूनी रोहिंग्यों को निकालना चाहती है पर सुप्रीम कोर्ट और विपक्ष दोनों इस काम में अड़ंगा लगाए हुए है, भारत का विपक्ष तो यहाँ तक मांग उठा चूका है की बॉर्डर खोल दो और सभी रोहिंग्यों को भारत में आने दो
जबकि ये बात सच है की रोहिंग्यो के कारण भारत में कई तरह की समस्या उत्पन्न हो रही है, पिछले दिनों जम्मू में एक आतंकी हमला हुआ था उसमे भी रोहिन्यों का नाम आया था, पर भारत का विपक्ष देशहित नहीं बल्कि वोट हित देखता है, इस मामले में श्रीलंका भारत से ज्यादा बेहतर है, चूँकि वहां का विपक्ष देशहित को प्राथमिकता देता है
