आज देवबंद के मुल्लाओं ने महिलाओं को नया फरमान सुनाया
अपने समाज की महिलाओं पर उन्होंने कई नियम थोपने की कोशिश की, बड़ी बात ये है की इन नियमों को बनाने में महिलाओं से कोई राय नहीं ली गयी
कट्टरपंथी समुदाय में महिलाओं से राय लेने की परंपरा कभी रही ही है, खैर
देवबंद का फतवा ये है की, मुस्लिम महिलाओं का बाल कटवाना, पारलर में जाना, आइब्रो बनवाना इत्यादि ये सबकुछ हराम है
यानि जो महिला बाल कटवाती है, जो मुस्लिम महिला पारलर जाती है, जो आइब्रो बनवाती है वो "@#$#" हुई
तीन तलाक हो, हलाला हो
ये कट्टरपंथी महिलाओं को कदाचित इंसान समझते ही नहीं, उनपर दरिन्दरी भरे फैसले सौंपे जाते है
महिलाओ के बाल काटने पर तो फतवा सुना दिया और बाल कटवाने को हराम भी घोषित कर दिया
पर दुनिया के अलग देशों में ही नहीं बल्कि भारत में भी
मुस्लिम महिलाओं का खतना किया जाता है, उनके गुप्तांगों के कुछ हिस्से को काट दिया जाता है, ये मानवता के खिलाफ कृत्य है जो लगातार चल भी रहा है


पर उसके खिलाफ मुल्लाओं ने कभी कोई फतवा नहीं सुनाया, बाल कटवाना तो हराम है, पर महिला का गुप्तांग काटना हलाल है
और कोई इसपर सवाल उठाये तो वो सांप्रदायिक
