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हज़ारों मंदिर तोड़े गए पर भारत के बुद्धिजीवियों का दर्द विदेशी लेनिन के लिए उठा : डॉ डेविड फ्रॉली


आपको आज हम कुछ उदाहरण बताते है, जिन्हे आप गौर से पढ़िए - मधु नाम के आदिवासी हिन्दू को केरल में (वामपंथी राज में) 16 दरिंदो ने मार दिया, जिसमे से 9 मुस्लिम और 7 वामपंथी थे, एक भी बुद्धिजीवी के सीने में इस घटना के बाद दर्द नहीं उठा, मामले पर कोई कुछ नहीं बोला 

अभी बीते दिनों ही पश्चिम बंगाल में मिदनापुर में 500 साल, जी हां 500 साल पुराने शिव मंदिर को ममाता बनर्जी की सरकार ने तोड़ दिया, उसपर भी देश का एक भी बुद्धिजीवी नहीं बोला, किसी के भी सीने में दर्द नहीं उठा, जबकि शिवमंदिर तो वामपंथ के समस्त इतिहास से भी पुराना था 

 भारत के बुद्धिजीवियों के दोगलेपन के बारे में जितना भी कहा जाये उतना कम है, त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति को तोडा गया तो वामपंथियों के अलावा कांग्रेस के नेता, आम आदमी पार्टी के नेता भी रुदाली करने लगे, और भारत में तालिबान है, सीरिया बन गया है ऐसी बातें करने लगे, इन लोगों के दोगलेपन को देखते हुए विदेशी मूल के लेखक डॉ डेविड फ्रॉली भी चौंक गए और देखें उन्होंने क्या कहा 

डॉ डेविड ने कहा की - भारत के बुद्धिजीवि  लेनिन की मूर्ति के तोड़े जाने के बाद बहुत आहात है, और ये लोग तिलमिलाए हुए है, इसी भारत में हज़ारों हिन्दू मंदिर तोडा गया, जिसपर इन बुद्धिजीवियों ने कभी आपत्ति भी दर्ज नहीं कराई, इन लोगों के लिए लेनिन ही ईश्वर है

बता दें की भारत के बुद्धिजीवी बार बार ये कह रहे है की हम तो जी लेनिन के समर्थक नहीं है पर तोड़फोड़ के विरोधी है, भैया 500 साल पुराना  हिन्दू मंदिर बंगाल में तोडा गया, मधु नाम का इंसान वामपंथी शासन में मार दिया गया, तब मुँह नहीं खुला, लेनिन की मूर्ति टूट गयी तो आप सामने आ गए, बुद्धिजीवियों ने साफ़ कर दिया की उनके लिए एक ही शब्द बना है वो है "दोगला"